शुक्रवार 1 मई 2026 - 10:18
पत्रकारों ने जंग ए रमज़ान में अमेरिका की धाक को ध्वस्त कर दिया

हौज़ा / आयतुल्लाह सईदी ने पत्रकारों के अपने कलम और कैमरे रूपी हथियारों के साथ दुश्मन के खिलाफ मीडिया जंग के मोर्चे पर डटे रहने का ज़िक्र करते हुए कहा,मीडिया वाले तीसरे ज़बरदस्त युद्ध में बहादुरी से दुश्मन के भारी मीडिया हमले के तहत डटे रहे, उन्होंने दुश्मन के क्रूर कृत्यों की पहली सच्ची रिपोर्ट दुनिया तक पहुंचाई, और पश्चिम में अमेरिका की नकली धाक को ढहा दिया।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,कुम अल मुकद्दस के इमाम ए जुमआ आयतुल्लाह सैयद मोहम्मद सईदी ने क़ुम में सफ़ीर प्रशिक्षण शिविर के पत्रकारों के सम्मान समारोह में जो इमाम खुमैनी (र.ह.) के हॉल के मेहराब कक्ष में आयोजित हुआ था, कहा,पत्रकारों ने अपने कलम और कैमरे जैसे हथियारों से दुश्मन के खिलाफ़ मीडिया जंग के मोर्चे पर डटे रहे।

उन्होंने तीसरे ज़बरदस्त युद्ध में बहादुरी से दुश्मन के भारी मीडिया हमले को सहा, दुश्मन के क्रूर कृत्यों की पहली सच्ची रिपोर्ट दुनिया तक पहुंचाई, और पश्चिम में अमेरिका की नकली धाक को ढहा दिया।

आयतुल्लाह सईदी ने कहा,अल्लाह ने पवित्र क़ुरान में ईमान वाले' कहा है, और उन्हें आदेश दिया है कि तुम्हारी रिपोर्टें, बातें और खबरें 'क़ौल-ए-सदीद' बिल्कुल सही और मज़बूत बात से सजी हुई हों, ताकि उनमें कोई कमी न रहे।

उन्होंने आगे कहा ,तक़वा को इंसान की रूह में बसना चाहिए। अगर तक़वा इंसान का स्वभाव न बन जाए, तो फिसलन बहुत होगी।

हज़रत मासूमा के पवित्र दरगाह के प्रभारी ने आगे कहा,यह हमारे पत्रकारों का गौरव है कि आज पश्चिमी मीडिया और इज़राइली शासन के क्षेत्र में यह कहा जाता है कि सही खबर इस्लामी गणतंत्र से सुननी चाहिए।

उन्होंने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा,आज हम आपको सलाम कर रहे हैं, जो गाथाओं, शहादतों और रमज़ान की जंग में सच्चाई के रखवाले हैं। आपने ईरानी राष्ट्र की ताकत दिखाने में अहम भूमिका निभाई, और अब भी अपना फ़र्ज़ निभा रहे हैं।

आयतुल्लाह सईदी ने पत्रकारों के साहस का ज़िक्र करते हुए कहा,पत्रकारों ने अपने कलम और कैमरे जैसे हथियारों से दुश्मन के खिलाफ़ मीडिया जंग के मोर्चे पर डटे रहे। वे तीसरे ज़बरदस्त युद्ध में बहादुरी से दुश्मन के भारी मीडिया हमले के नीचे थे। उन्होंने दुश्मन के क्रूर कृत्यों की पहली सच्ची रिपोर्ट दुनिया तक पहुंचाई, और पश्चिम में अमेरिका की नकली धाक को ढहा दिया।

उन्होने कहा,अगर बुद्धिमान इन्केलाबी नेता शहीद ख़ामेनेई की मज़लूमाना शहादत के बाद तुम्हारी मेहनत और जिहाद न होता, तो आज दुनिया इस्लामी गणतंत्र की वैश्विक ताकतों पर जीत का स्वाद नहीं चखती।

अंत में, इमाम रज़ा (अ.स.) के जन्मदिन की मुबारकबाद देते हुए उन्होंने साफ कहा,इस साल का 'दह-ए-करामत' खून, गाथा, सम्मान, जोश और मज़लूमियत से भरा हुआ था।

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